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पहली मोहब्बत

  पहली मोहब्बत   जब प्यार किसी का जबां पे होता है ये दुनिया मीठी और हम प्यासे लगते है   रफ्ता - रफ्ता प्यार की गहराई में चांद सितारे दिखने लगते है हर दौर के किस्से अपने प्यार की परछाई लगने लगते है   एक दिन की दूरी बरसों का इंतजार बनने लगता है कई दिवानों की टोली में अपना प्यार ही जग जाहिर सा लगता है   जब प्यार किसी का अहसास अपना बनने लगता है ये दुनिया प्यारी बन हम महसूस उसे करने लगते है   सांचे में गढता प्यार ये सूरत प्रेम के दोनों पंछी बनने लगते है कहीं पुरानी मुरत के जोडे में अपने प्रेम की सूरत प्रेमी बनने लगते है   व्याकुल नजरों की अधीरता से हर पल इंतजार अपने प्यार का रहता है कुछ छुट गया जो पीछे मन सच में बेचैन पागल सा होकर तडप उठता है   नयी पुरानी बातें दिल की एक छलांग से दूजे दिल का रस्ता तय करती मन की बेफिक्री से निकले सभी अरमानों को दिल का रस्ता ये बनाती   जब प्यार किसी का तडप कर अप

is zamane ke log

  खिसक गया जो चांद अपनी जगह से मायूसिया जमाने की फिर भी कहां जायेगी   रफ्तार तेज हो गयी जाने की जुदाई पास आ गई जमाने की   किन आंखो से देखे अब दुनिया को आसूं इतने निकले कि सवाल कर रहे आंसू भी आखों से   एक समय चंचल मस्कान सिरहाने खेला करती थी अब उम्मीद नही बंजर सपनों की दुनिया से भी   हर ओर नापती आंखे घूम रही अपनी दुनिया खुद सें छुट रही जाने क्या क्या राग अलापे जुदाई जमाने से फिर भी छुट न पाय   वक्त से आगे भागे दुनिया वक्त की मुठठी खोले दुनिया मेहरबां खुद को समझ ऊँचा बन कर खुद से अकडे   अलविदा कहने से लेकिन कहां रूक पायी है दुनिया     लोग कहां से आये कहां गये किसे पता अपनी हस्ती के जाम छलका रहे यही सभी को पता रात की मस्ती मेहमां की हस्ती बनी जमाने की खास ये रस्में कही दीवाने की सुरत है फिरती कही से लाल गुलाब की खुशबू है निकलती कही बजे ठहाको के है डंके कही उडी नारियों की है तितलियां हर ओ